भाभी की साडी में
 
भाभी की साडी में...
दिवाली के समय की बात है, मैं अपने घर जो दुसरे शहर में है, गया हुआ था! हमारे मोहल्ले में पड़ोस में एक व्यक्ति हैं, जो मुझसे बड़े हैं, और हम सब उन्हें भैया कहते हैं! भैया शादीशुदा हैं! और उनकी अर्धांगनी यानी हमारी भाभी बहुत ही अच्छी हैं! सबसे मेल-जोल रखना, सबका आदर करना, सबसे प्यार से बातें करना और हर किसी को इज्ज़त देना उनकी पर्सनालिटी में चार चाँद लगा देता है!

अब मैं दिवाली पर घर गया हुआ था! तो, मोहल्ले में सभी से बातचीत हो जाती है! उन लोगो को भी अच्छा लगता है क्यूंकि मैं अपने शहर कम ही जाता हूँ! लेकिन हर किसी से बात करना, उनका कहना मानना, प्यार से बात करना और हँसी मजाक करना अपनी भी आदत है! इसलिए वो सब मुझे अच्छा मानते हैं और हमेशा मुझसे बात करने बात के लिये आतुर रहते हैं!

दिवाली से 2 दिन पहले की बात है, हमारे मोहल्ले में पड़ोस में एक छोटा लड़का था! उसकी उम्र कोई 10-11 साल की रही होगी! वो लड़का बहुत ही शरारती, गाली देने में मास्टर, और किसी की ना सुनने वालो में था! शाम को वो अपने पटाखे जलाकर सड़क पर फ़ेक रहा था! अक्सर हमारे मोहल्ले में लोग ऐसे ही करते है! और हम लोगो ने भी बचपन में वही किया था, तो अब वो कोई नयी बात नहीं है!

उस दिन रात के करीब 8 बजे हुए थे! और वो छोटा लड़का पटाखों में चुहिया जलाकर छोड़ रहा था! मैं भी अपने घर के बाहर खड़ा उसे देख रहा था कि पड़ोस की भाभी भी आ गयी, और हम दोनों खड़े खड़े बातें करने लगे कि, अचानक उस छोटे लड़के की छोड़ी हुई चुहिया बगल में खड़ी भाभी की साडी में घुस गयी! और वो जोर से चिल्लाई! मैने भाभी को पकड़ा और पुछा कुछ हुआ तो नहीं? भाभी ने साडी ने उठाई और अपना पाँव दिखाया! उनका पाँव जल गया था! मैं उन्हें घर के अन्दर ले आया! भाभी अंदर नहीं आना चाहती थी, लेकिन मेरे जिद करने पर वो अंदर आ गयी! उन्होंने अपनी साडी उठाई, फिर मैंने उनके जले हुए पाँव पर बर्नोल लगाया! जब उन्हें शांति पड़ी तो उन्होंने मेरा शुक्रिया अदा किया और चली गयी!

आज भी जब भाभी मुझसे मिलती हैं, तो मैं उन्हें हमेशा इसी बात पर छेड़ता हूँ कि, भाभी की साडी में चुहिया और वो शर्मा जाती हैं! सच में वो भाभी दिल की बहुत ही अच्छी हैं!


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