मेरा पहला स्पर्श...
 
मेरा पहला स्पर्श...
हेल्लो दोस्तों! यह मेरे जीवन की एक सच्ची कहानी है! जब मैं बहारवी कक्षा मैं पढ़ रहा था! उस वक़्त हमारे घर में एक मैड काम करती थी (जो तीस साल की तलाकशुदा लेकिन बहुत खुबसूरत थी!) जो सुबह दस बजे आती थी और दिन मैं दो बजे चली जाती थी! उस वक़्त मैं सत्रह साल का नवयुवक था! जो बड़ा ही सीधा-साधा और हर बात से अनभिज्ञ था! लेकिन मुझे वो औरत अन्दर से बहुत अच्छी लगती थी! लेकिंग मैं किसी से कुछ कह भी नहीं सकता था!

एक दिन जब मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था (जोकि दुसरे माले पर था) वो कपडे सुखाने के लिये आयी और मेरे लिये कुछ खाने का सामान भी ले आयी! जब मैंने उसे साइड टेबल पर रखने को कहा, तो वो खाने का सामान लेकर मेरे करीब आ गयी और एक गस्सा मेरे मुह मैं डाला और मुझे एक पप्पी गाल पर दे कर चली गयी! मुझे आज भी वो एहसास है, जब मेरे अन्दर एक बिजली कौंध गयी! और उसी एक चुम्बन ने मुझे उसके करीब लाने का रास्ता खोल दिया!

फिर एक दिन वो आया, जब मैं और मेरी दादी (उस वक़्त मेरी दादी की उम्र पिचहत्तर साल थी, आज वो नहीं हैं!) घर में अकेले थे और सारे घर वाले शहर से बाहर दुसरे शहर मैं किसी रिश्तेदार की शादी में शरीक होने गए हुए थे! उस दिन भी वो अपने वक़्त पर काम करने आयी! मेरी दादी अपने काम में व्यस्त थी और मैं अपने कमरे में पढाई कर रहा था! उस दिन उसका फिर से मेरे कमरे मैं आना जाना शुरू हुआ, और कभी कभी मेरे हाथ तो छूना और मुझे तंग करना, उसका मुझे अच्छा लगने लगा! अन्दर ही अन्दर मैं उसकी तरफ खिच रहा था! जब ३-४ बार उसने इस तरह से किया, तो मुझे भी उसे छेड़ने की इच्छा होने लगी और फिर अचानक वो मेरे पीछे से आयी और मुझे मेरे पीछे से पकड़ कर मेरे गालो को चूमने लगी! मैंने उसी वक़्त उसका हाथ पकडा, और अपने सीधे हाथ की तरफ ले आया! और उसको कस के उसकी कमर से पकड़ लिया!

फिर मैंने उसे अपनी कुर्सी पर बैठाकर कमरे का दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया! और उसके करीब जाकर अपनी बाहों में लेकर चूमने लगा! हम दोनों की साँसें बहुत तेज चल रही थी! मन में एक डर था! और दोनों पसीने में लथपथ थे लेकिन इसके बाद भी हमदोनो को एक दुसरे के सिवा किसी और का ख्याल नहीं था!

हम दोनों एक दुसरे को एक दुसरे की बाँहों मैं जकरे हुए एक दुसरे को चूमते हुए! एक दुसरे की पीठ पर हाथ सहलाते हुए, एक दुसरे को कस के पकडे हुए वो आनंद महसूस कर रहे थे, कि अचानक उसने मेरी कमीज़ के बटन खोलने शुरू कर दिए, मुझे अन्दर से शर्म आ रही थी लेकिंग जब मेरा हाथ उसकी छाती पर गया और मैंने उसकी वो सेक्सी आवाजे सूनी तो उसने मुझे और उत्तेजित कर दिया! मैंने भी उसके ब्लाउज के बटन खोल दिये और पहली बार किसी को ब्रा में देखकर मैं और उत्तेजित हो गया!

मेरा धैर्य अपना आपा खो रहा था और वो मुझे अपनी तरफ खीच रही थी! फिर उसने अपनेआप अपनी ब्रा भी उतार दी और मैंने पहली बार सत्रह साल की उम्र में किसी स्त्री को बिना कपड़ो के देखा! लेकिन येह आग अभी भुजी नहीं थी बल्कि बढ़ रही थी! मुझे भी इतनी उत्तेजना थी की मेरा हाथ अब उसके पूरे बदन पर चल रहा था, और मैं उसे धीरे-धीरे अपनी बाहों में जकड रहा था और अपनी तरफ खीच रहा था! जैसे-जैसे वक़्त बढ़ रहा था, उसकी वो सिसकियाँ और बढ़ रही थी जो हम दोनों को एक दुसरे का होने पर मजबूर कर रही थी!

हम दोनों इतने उत्तेजित हो चुके थे की अब हम दोनों को रोक पाना मुश्किल था, और बाद मैं वही हुआ की मैं कुछ कर पाता कि मैं अपने आप ही स्रावित हो गया! और उसके बाद मुझे उससे इस तरह मिलने का मौका ही नहीं मिला!


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