वो मस्तानी रात
 
वो मस्तानी रात...
मैंने शायद अपनी ज़िन्दगी में, कभी हार नहीं मानी, और हमेशा यही कहता आया कि, ज़िन्दगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं है, लेकिन उसके लिये आपको आपका हौसला, जिगर और मेहनत की ज़रूरत है! और प्यार पाने की तड़प में तो इंसान कुछ भी कर जाता है! लेकिन जब, किसी के दिल में किसी के लिये एक जगह बन जाती है, तो वो, उसके लिये कुछ भी, कहीं भी, कर सकता/सकती है! यही है वो एक दस्तान।

हम दोनों एक दुसरे के टच में थे, एक दुसरे से रोज फ़ोन पर बातें करते थे. एक दिन (उस दिन अस्ठ्मी थी) उसने अपने ऑफिस के बाद मुझसे मिलने को कहा, क्यूंकि अगले दिन उसकी छुट्टी थी! हम दोनों मिले, मैंने उससे कहा कि, आज घर पर कोई नहीं है, उसने भी कुछ इस तरह प्लान किया कि, वो राजी हो गयी. रास्ते में एक वाइन शॉप से मैंने 2 बोतल व्हिस्की ले ली. उसने मना किया, क्यूंकि उसका उस दिन फ़ास्ट था! मैंने कहा कि, फ़ास्ट तुम्हारा है, और तुम 12 बजे के बाद पी लेना, उसने कहा ठीक है।

हम घर पहुचे, और अब रात के करीब 9 बज चुके थे, उसने नहाने को कहा, और नहाने चली गयी, मैंने अपना एक पेग बनाया और पीने लगा. मैंने उससे खाने का पुछा, उसने मना कर दिया, और मुझे दारु पीते देखकर कहने लगी "कमीने हो अकेले अकेले पी रहे हो", मुझे हँसी आ गयी, मैंने कहा, "क्या एक पेग बना दूं, तुम्हारा?" उसका जवाब था "हाँ".

उसने भगवान् को सॉरी कहा, और अब हम दोनों दारु पीने लगे. 2 पेग्स लेने के बाद एक दुसरे को किस करते रहे, उस समय, हम दोनों, डिम लाइट में, बिना कपड़ो के, एक दुसरे के शरीर के साथ खेल रहे थे. एक दुसरे को संतुष्ट करके, अब हमे भूख लगने लगी थी, तो मैंने उससे खाने का पुछा! अपने लिए मैंने नोन-वेज आर्डर किया, वो नॉन-वेज नहीं खाना चाहती थी, लेकिन वो खाने में कंफ्यूज कर रही थी! आखिर, उसने नहीं कहा, "जब अस्ठ्मी, को दारु पी ली है, तो अब नोन-वेज में क्या प्रॉब्लम है?" मैं हँसता रहा, और खाने का आर्डर कर दिया।

रात करीब 12 बजे हम दोनों ने खाना खाया, दारू हम दोनों पीते रहे और हमारी रति-क्रीडा भी चलती रही! वो, मेरे लिये कुछ भी करने को तैयार थी, उसे एक ऐसा इंसान जो मिला था, जिसके साथ वो दिल से, खुलकर अपनी लाइफ एन्जॉय कर सकती थी।

हम दारु पीते रहे, मैं उसके गोरे सेक्सी बदन के साथ खेलता रहा! कभी वो उपर, तो कभी मै! हम दोनों इतने खुश थे, की उस दिन शायद हम दोनों हर उस पोजीशन को, जो की कामसूत्र में वर्णित है, हमने ट्राई की, और किसी हद तक सफल भी हुए. उस रात हमने करीब 14 बार एक दुसरे को संतुष्ट किया।

हम दोनों सुबह करीब 6 बजे सोये! 8 बजे मेरी नींद खुल गयी, और उसके गोरे, चिकने सेक्सी बदन ने मेरा मूड फिर बना दिया! लाजमी था कि, एक बार और सुबह की ठुकाई का आनंद लेने का, जो हम दोनों ने लिया!

उसके भरे हुए गोरे चिकने बदन को देखकर, मन हमेशा उससे लिपट जाने को करता रहा. उसके गोरे चिकने स्तनों को टच करते हि, उनका खड़ा हो जाना, गजब था! दारु पी कर उसका और ज्यादा जंगली होना मुझे आज भी उस मस्तानी रात की याद दिलाता है।

वो, अब शादीशुदा है, लेकिन हम दोनों एक दुसरे के संपर्क में आज भी हैं. जल्दी ही, हम दोनों का एक बार फिर, मिलने का प्लान है…!


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