हाँ, वो हनी-मून ही तो था.....
 
हाँ, वो हनी-मून ही तो था ...
कई दिनों चैट करने के बाद एक दिन, आखिरकार, हम मिले. मैं उस दिन बहुत ही उत्साहित था. मन में सवाल उठ रहे थे कि वो कैसी दिखती होगी और क्या वो मुझे पसंद करेगी? उस दिन मैंने बहुत अच्छे कपडे पहने और स्मार्ट बनके उसकी बताई जगह पर पहुच गया. वो करीब 15 मिनट्स लेट आई ...

सुन्दर सी लड़की, सलवार कमीज़ में, गोरी चिट्टी , मेरे सामने खड़ी थी. मैं उसे देख के दंग हो गया. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं उसके साथ समय बिताऊंगा. मुझे लग रहा था कि उसे भी मैं पसंद आ रहा हूँ. शायद, उस दिन मैं, उस से मिलने के ख़ुशी में कुछ ज़यादा ही उत्साहित था और बहुत ज़यादा बोल रहा था. यकीनन, मैं थोडा नर्वस भी था. हम दोनों जिस तरह से फ़ोन पर, या फिर चैट पर बात किया करते थे , वैसा कुछ भी नहीं बोल पा रहे थे. मैंने उसके साथ ज़िन्दगी के बेहद ही खूबसूरत दो घंटे बताये. वापस घर पहुचते ही उसको फ़ोन करा, पूछा की वो भी घर पहुची की नहीं और फिर उससे मेरे बारे में पूछा की उसको मैं पसंद आया कि नहीं. उसका "हाँ" सुन के मैं और भी ज़यादा confident हो गया.

अब हम रोज़ बात करते और अपनी मुलाकात को बार-बार याद करते थे. मैं जनता था कि, मुझे उस से प्यार नहीं हुआ, पर उस का साथ और उस के बारे में सोचना बहुत अच्छा लगता था. एक दिन बातो ही बातो में मैंने उससे पूछा कि कभी ऐसा मौका हुआ, तो क्या वो मेरे साथ छुट्टिया बिताने चलेगी ? उस ने बड़े प्यार से कहा, “हाँ क्यूं नहीं, पर मैं जानती हूँ, की ऐसा मौका कभी नहीं आएगा”. बस यह सुन कर मैं मन ही मन उस मौके की तलाश करने लगा जब मैं उस से अकेले में मिल पाऊँ और उसे बता सकूं की वो मुझे कितना आकर्षित करती है.

हमारी बातों का सिलसिला यूही चलता रहा और अब हम दोनों घर से बाहर, अकेले जाने की बात करते रहते थे. मैं जानता नहीं था कि उस के साथ कई दिन और कई रात बिताने का मौका मुझे मिलेगा भी या नहीं. और फिर एक दिन उस ने कहा कि उसने अपने घरवालो को convince कर दिया है कि, वो अपनी सहलियों के साथ शहर से बाहर जा रही है. बस, फिर क्या था, मेरी तो समझो lottery ही निकल गयी.

मैं काम का बहाना लगा कर, और वो अपनी सहेलियों के साथ घूमने का बहाना लगा के, 4 दिन और 4 रातो के लिए एक हिल स्टेशन पर चले गए. हिल स्टेशन पर पहुचके हम लोगो ने एक अच्छा सा रूम बुक किया. रूम में अपना सामान रख कर मैंने उसे अपने गले लगाया और कहा कि मैं बहुत ही बेसब्री से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था. मेरी इस बात पर उसने भी हामी भरी. वो कुवारी थी और थोडा सहमी हुई थी. मैंने उसे प्यार किया और भरोसा दिलाया.

वो 4 दिन मेरी ज़िन्दगी के बेहद ही हसीन दिन थे. हम दोनों चार दिनों तक कमरे से बाहर नहीं निकले. हमने एक दुसरे को बहुत और कई बार प्यार किया. यह जानते हुए, कि ऐसा मौका दुबारा नहीं आएगा, हम ने एक दूसरे का साथ पल भर भी नहीं छोडा. वो 4 दिन और 4 रातें हम दोनों नव-विवाहित शादी-शुदा जोड़े की तरह रहे. वो जोड़ा, जो बहुत दिनों से मिलने के लिए तड़प रहा था....

आखिर वो दिन भी आया जब हमें अपने घर वापस जाना था. जाते जाते मैं वेटर को, जिस ने हमारा बहुत साथ दिया था, 100 रूपए देते हुए बोला – “आप का बहुत बहुत धन्यवाद”. इस पर वेटर बोला , सर मैं हनी-मून कपल से 200 रूपए से कम नहीं लेता. उसकी यह बात सुन के मैं मुस्कुरा पड़ा....और उसे 200 रूपए दिये.

हाँ, वो हनी-मून ही तो था........


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