हम फिर मिले ......
 
हम फिर मिले...
मैं वापिस तो आ गया पर मुझे यकीन था कि वो हमारी आखिरी मुलाकात नहीं थी. दिन गुज़रे… महीने गुज़रे, हम अभी भी बात किया करते थे. अब मुझे कोई शक नहीं था, कि उसे मुझसे बेहद प्यार हो गया है. उसने अपने प्यार का इज़हार कई बार किया … पर मैंने कभी भी उसको नहीं कहा, कि मुझे भी उससे प्यार है. और होता भी कैसे, मैं किसी और से जो प्यार करता था. यह बात तो वो भी समझ रही थी की हमारा रिश्ता सिर्फ़ "physical" रह गया था।

अब आलम यह था, कि मैं उससे मिलना चाहता था यह जानते हुए कि मुझे उस से प्यार नहीं है. ना ही मैं कोई "commitment" दे सकता था उसे. और फिर, एक दिन मैंने उसको सब कुछ सच-सच बता दिया. उसका दिल टूट गया. मैंने उसे समझाया कि मैं यह बात उससे छुपा भी सकता था और चाहता तो उसे धोखा भी दे सकता था. उसने मेरी इस बात को समझा.

दिन बीतते गये, अब मुझे उस के साथ की ज़रुरत पड़ने लगी. मैंने उससे इस बात का इज़हार भी किया. उसने भी कहा कि, वो जानती है, कि वो मुझे हमेशा के लिए नहीं पा सकती, पर फिर भी वो ज्यादा से ज्यादा समय मेरे साथ रहना चाहती है. अब तक वो मेरी बहुत ही अच्छी दोस्त बन चुकी थी. वो दोस्त, जिससे मैं अपनी हर एक बात "share" कर सकता था.

दिन जैसे-जैसे बीत रहे थे, हमारे मिलने की तड़प और बढ़ रही थी. इस बार "plan" यह था की हम घर के पास ही कहीं जायेंगे, ताकि हम ज़यादा से ज़यादा वक़्त एक दुसरे के साथ बिता पायें. फिर वो दिन आ ही गया जब हम मिले…

एक छोटे से बस के सफ़र के बाद, हम अपनी मंजिल पर पहुच गये. होटल ढूँढा और कमरा "book" किया. कमरे में पहुचते ही, उस ने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और मुझे Bed पर लेटने को कहा. यह कह कर कि उस के पास मेरे लिए एक surprise है… वो बाथरूम में चली गयी. मैं बेताबी से उसका बिस्तर पर इंतज़ार करता रहा. वो इंतज़ार जो शायद मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा इंतज़ार था. आखिर, वो बाथरूम से निकली. उसने सिर्फ एक वेस्ट ("बनियान") पहनी हुई थी. वो मेरी वेस्ट थी, जो पिछली बार वो अपने साथ ले गयी थी. मैं उस को देखता ही रह गया. ऐसा लग रहा था कि वो इस मुलाक़ात के लिए सारी तैयारी करके आई है. वो मरे पास ऐसे आई जैसे वो मुझे बताना चाहती हो, कि उसने मुझे इतने महीने तक कितना मिस किया. मैं हमेशा से उसे बहुत ही शर्मीली लड़की समझता था, पर आज, जैसे, उसने कपड़ो के साथ साथ अपनी शर्म भी उतार दी थी. मैंने उसे ऐसे कभी भी नहीं देखा था. पुरे दो घंटे तक वो मुझ पर हावी रही और मुझे प्यार करती रही.

हम लोग, उस होटल में, तकरीबन, 3-4 दिन रहे. एक दोपहर, हम दोनों "swimming pool" में स्विमिंग करने गये. मुझे याद है, उस होटल में, एक युवक मुंबई से आया हुआ था. वो युवक हमें अक्सर होटल में देखा करता था. उस युवक ने मुझसे बात शुरू करी और अपने शहर की बहुत तारीफ करने लगा. उस ने मुझे बताया कि उसका शहर लड़के-लड़कियों के मामले में कितना "advance" है और कैसे वो, और शहरों को, अपने शहर के सामने बहुत छोटा मानता है. फिर उस ने मुझसे पुछा, कि हमारी शादी को कितना समय हो गया है. मैंने बड़ी ही विनम्रता से कहा कि, हमारी शादी नहीं हुई है. यह सुन कर उस के तो जैसे होश ही उड़ गये… शायद उसने उम्मीद नहीं की थी कि, हम शादी शुदा न होंते हुए भी एक साथ रह रहे थे. अब उस का "बड़े शहर" वाला घमंड तोडना मुझे अच्छा लग रहा था. दिल ही दिल में मैं, बहुत खुश था.


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